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Virtual Reality क्या है? यह कैसे काम करता है ? ( पूरी जानकारी )

Virtual Reality kya hai: Virtual Reality को हम VR के शार्ट नाम से भी जानते है।मानव जीवन को बेहतर अनुभव प्रदान कराने के लिए तकनीकी क्षेत्र में रोज नए विकास हो रहे हैं। रेडियो द्वारा हम सुन सकते हैं, मोबाइल के द्वारा हम सुन सकते हैं और देख सकते हैं, उसी तरह नई प्रणाली का विकास होते जा रहा है जहां हम सुन सकते हैं, देख सकते हैं और महसूस भी कर सकते हैं।आज इस आर्टिकल मे हम तकनीक का नया रूप Virtual Reality के बारे मे जानेंगे, यह क्या है,कैसे काम करता है और हमारे लिए किस तरह उपयोगी है।

वर्चुअल रियलिटी (Virtual Reality) क्या है:

सबसे पहले हम इसके नाम का अर्थ समझते है।वर्चुअल यानि आभासी/काल्पनिक और रियलिटी यानि वास्तविकता। वर्चुअल रियलिटी का मतलब कंप्यूटर के 3D-Graphics,software और hardware की मदद से ऐसी काल्पनिक दुनिया या माहौल को बनाना होता है,जिसमे virtual Reality equipment का इस्तेमाल कर रहे व्यक्ति को ऐसा लगे जैसे कि वह सच में उस दुनिया में है।Virtual Reality प्रौद्योगिकी का एक ऐसा विकसित रूप है जो काल्पनिक दुनिया को वास्तविक दुनिया का अहसास कराता है।

इस तकनीक के द्वारा ऐसा काल्पनिक वातावरण तैयार किया जाता है जहां हम सुन सकते है,देख सकते है और उस जगह पर खुद को उपस्थित पाते है(3डी व्यू की मदद से)।

Virtual Reality कैसे काम करता है:

virtual reality के आभास को समझने या महसूस करने के लिए बहुत सारे उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इन सारे उपकरणों के एक साथ उपयोग से हमें काल्पनिक दुनिया सच और वास्तविक दुनिया लगने लगती है।आइए जानते है इन उपकरणो(Equipment) के बारे मे।

कंप्यूटर Hardware और Software:

किसी भी वर्चुअल रिएलिटी एप्लीकेशन के लिए एक कंप्यूटर हार्डवेअर के साथ एक साफ्टवेयर की जरूरत होती है।
कंप्यूटर VR input data को प्रोसेस करता है जिससे VR device को meaningful output मिल सके। जबकि एक software प्रोग्राम तेज और वास्तविक response के लिए input और output data दोनों को मैनेज करता है।

Input device:
इनपुट डिवाइस की मदद से इस्तेमाल करने वाला वर्चुअल रिएलिटी के वातावरण मे navigate और interact कर सकता है।उपयोग कर्ता के हलन-चलन, स्थिति आदि की जानकारी कंप्यूटर के लिए इनपुट डेटा बन जाती है।

Output device:
आउटपुट डिवाइस है VR BOX/ Headset।बाइक पर पहननेवाले हेल्मेट की तरह ही इसे भी पहना जाता है।यह VR के कंटेंट को output के तौर पर एक complete 360 surround effect, 3D अनुभव के साथ प्रस्तुत करता है।इस headset को पहन कर आप रियल टाइम में अपना head move करते हुए दृश्य को सुचारू रूप से बदलता हुआ देख सकते हैं और वर्चुअल रियलिटी का आनंद उठा सकते है।आपकी head और body जिस तरह से move कर रहे हैं और ये picture को उसी हिसाब से adjust कर देता है।

3D ऑडियो:
वर्चुअल रियलिटी के अनुभव के साथ वास्तविक audio effect को महसूस करने के लिए 3D ऑडियो का इस्तेमाल किया जाता है। उपयोगकर्ता जो भी देखता है और अनुभव करता है उसी के हिसाब से sound generate होती है। इससे निकलने वाली sound बिल्कुल वास्तविकता का अनुभव कराती है। जो इस्तेमाल करने वाले की दूरी, मूवमेंट्स, समय और दूसरे बिन्दुओ के आधार पर संचालित होती है।

वर्चुअल रियलिटी के प्रकार:

वर्चुअल रिएलिटी के पांच प्रकार निम्नलिखित है।


Non-immersive Virtual Reality:
Non-immersive VR में एक कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है जहां हम software की मदद से कुछ किरदार और हाव-भाव को कंट्रोल कर सकते हैं, लेकिन माहौल आपके साथ सीधे तौर पर interact नहीं करता है।

Fully-immersive Virtual Reality:
Fully Immersive VR में आप वास्तविकता को अनुभव कर सकते हैं।पर इसमें आपको ऐसा लगेगा मानो आप किसी वर्चुअल दुनिया में शारीरिक रूप से मौजूद हैं और आपके साथ सब कुछ हकीकत में हो रहा है।इस तकनीक मे आपने पहने हुए हैडसेट, ग्लोव्स आदि को कंप्यूटर से जोड़ दिया जाता है। आपकी हलन-चलन और फेशियल मूवमेंट्स को भी आभासी दुनिया के साथ जोड़ दिया जाता है।जिससे आपको ऐसा फील होता है जैसे आप भौतिक रूप से इस वर्चुअल वर्ल्ड में मौजूद हैं।

Semi-immersive Virtual Reality:
यह non-immersive और fully immersive virtual reality का मिश्रण है। यह 3D space या virtual वातावरण के रूप में हो सकता है जहां आप कंप्यूटर स्क्रीन या VR Box/Headset के माध्यम से अपने दम पर घूम-फिर सकते हैं। इसलिए virtual world के साथ सभी activities आपकी तरफ केंद्रित होती हैं।
हालांकि, यहां आपके वर्चुअल अनुभव के अलावा कोई वास्तविक शारीरिक हलन-चलन नहीं होती। कंप्यूटर पर आप mouse की मदद से और मोबाइल पर touch और swipe की मदद से virtual space में घूम सकते हैं।


Augmented Reality:
Augmented Reality में कोई वस्तु या डिवाइस असली में दिखाई पड़ता है जबकि वास्तव में ऐसा नहीं होता है। यह आपको virtual world में नही ले जाता है बल्कि एक वर्चुअल वस्तु को किसी डिवाइस की मदद से वास्तविक दुनिया में रखा जाता है।

Collaborative Virtual Reality:
यह वर्चुअल दुनिया का वो रूप है जहां कई लोग अलग-अलग जगह से, आमतौर पर 3D या projected character के रूप में, एक दूसरे के संपर्क में आ सकते हैं।यहा एक दूसरे के साथ माइक्रोफोन, हेडसेट के जरिए बातचीत कर सकते है।

Virtual Reality का विभिन्न क्षेत्रो मे उपयोग

Virtual reality के अनुप्रयोग बहुत सारे क्षेत्रों में लाभकारी सिद्ध हुए हैं। इस तकनीक द्वारा हमारे मस्तिष्क में उठी हुई कल्पना को एक सच्चाई का रूप दे सकते हैं जिससे युद्ध क्षेत्र, शिक्षा, परीक्षण आदि में इसका कई तरीको से इस्तेमाल किया जा सकता है।


शिक्षा के क्षेत्र मे:
जिस भी विषय विशेष को समझने के लिए ज्यादा इंद्रियों का इस्तेमाल करते हैं तो उसे बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। यह तकनीक छात्रों को समझने में मदद कराती है। अंतरिक्ष का ज्ञान हो या इतिहास के पुरानी बातों को जानना या विज्ञान के किसी अनुसंधान को समझना इस तकनीक के द्वारा समझना आसान हो जाता है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र मे:
स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस तकनीक का महत्वपूर्ण योगदान है। इस तकनीक की सहायता से डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टाफ आदि को सही प्रशिक्षण दिया जा सकता है। शल्य चिकित्सकों को सिखाने के लिए कई कंपनिया इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल कर रही है, इससे उनका अनुभवी प्रदर्शन देखने मिला।

रक्षा क्षेत्र मे:
इस तकनीक के द्वारा आधुनिक हथियारो के इस्तेमाल, लड़ाकू विमानो का इस्तेमाल ,सैन्य प्रशिक्षण आदि मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । युद्ध की रणनीति बनाने,युद्ध की बारीकिया सीखने तथा सैनिकों को विभिन्न मौसमी परिस्थितीयो से निपटने के लिए तैयार करती है। विकसित देश इस तकनीक का इस्तेमाल रक्षा क्षेत्र में भी कर रहे हैं।

मनोरंजन मे:
सबसे पहले इस तकनीक का इस्तेमाल फिल्मों में हुआ। हम 3डी फिल्में देखने जाते हैं वहां पर दर्शक, दर्शक बनकर ही नहीं बल्कि किरदार बनकर भी फिल्म देख सकता है। यह बहुत ही मजेदार एहसास है। ऐसी फिल्मों में दर्शक भावनात्मक रूप से कहानी में जुड़ जाते हैं।विज्ञान पर आधारित फिल्मो मे इस तकनीक का बहुत उपयोग होता है।

खेलो मे:
खेलों में इस तरह की तकनीक से अच्छा प्रशिक्षण दिया जा सकता है और उनके प्रदर्शन को बेहतरीन बनाया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: Metaverse क्या है? यह कैसे काम करता है

वर्चुअल रियलिटी के फायदे:

  • वर्चुअल रियलिटी के इस्तेमाल से उपयोगकर्ता को काफी बेहतरीन/रोमांचक अनुभव मिलता है।
  • यह एक अलग दुनिया में ले जाता है।
  • हमारी टेंशन और डिप्रेशन को थोड़ी देर के लिए भगा देता है।
  • एक वास्तविक दृश्य प्रदान करता है, मानो आप उसी जगह मौजूद है।

Virtual Reality के नुकसान:

  • वीआर आप को असली दुनिया से दूर ले जा सकता है।
  • वीआर आपके समय का अधिग्रहण कर सकता है।
  • ज्यादा इस्तेमाल से आँखों की रोशनी पर फ़र्क़ पड़ सकता है।

हम सब भी इस तकनीक को कहीं ना कहीं और किसी न किसी रूप में इस्तेमाल कर चुके हैं।और उम्मीद है मेरी तरह आपका भी अनुभव अच्छा रहा होगा। मैं आशा करती हूं आपको मेरा यह आर्टिकल”Virtual Reality Kya Hai “पसंद आया होगा। मैंने इस तकनीक को बहुत ही आसान शब्दों में आपके सामने रखा, जिसे आप आसानी से समझ सकते हैं और दूसरों के साथ भी शेयर कर सकते हैं।धन्यवाद!!

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